युवा
जोश की बदलती सोच का परिणाम
(सामयिक) यह लेख 19मई2014 को द सी एक्सप्रेस मे प्रकाशित हो चुका है
ये चुनावी परिणाम युवा जोश की बदलती सोच का परिणाम कहा जा सकता है, सोशल मीडिया, इंटरनैट के माध्यम से बना एक वैश्विक जुडाव युवाओ को नयी तरह से सोचने का मौका दे रहा है। ग्लोबलाइजेशन का भरपूर अहसास अबके चुनावी नतीजे दिखा रहे है। ये एक परिवर्तन का आभास करा रहे है कि चिर-परिचित तरीको से आगे बढना सम्भव नही होगा, जो उन तरीको पर अटके रहेंगे, उनके लिए अपना अस्तित्व बचाये रखना आसान नही होगा। जिनको अपने बैंक बैलेंस पर जरूरत से ज्यादा यकीन था, उनको इस बार चुनावी नतीजो ने अब सोचने के लिए मजबूर भी कर दिया होगा। बहुतो से अच्छे तो राजनीति क़ी नयी खिलाडी कहे जानी वाली आम आदमी पार्टी रही जिसने नये प्रचार साधनो का बखूबी प्रयोग किया और अपनी बात जनता तक पहुँचाने मे कई राजनीति के पुराने स्थापितो से बेहतर साबित हुए।
ये चुनावी परिणाम युवा जोश की बदलती सोच का परिणाम कहा जा सकता है, सोशल मीडिया, इंटरनैट के माध्यम से बना एक वैश्विक जुडाव युवाओ को नयी तरह से सोचने का मौका दे रहा है। ग्लोबलाइजेशन का भरपूर अहसास अबके चुनावी नतीजे दिखा रहे है। ये एक परिवर्तन का आभास करा रहे है कि चिर-परिचित तरीको से आगे बढना सम्भव नही होगा, जो उन तरीको पर अटके रहेंगे, उनके लिए अपना अस्तित्व बचाये रखना आसान नही होगा। जिनको अपने बैंक बैलेंस पर जरूरत से ज्यादा यकीन था, उनको इस बार चुनावी नतीजो ने अब सोचने के लिए मजबूर भी कर दिया होगा। बहुतो से अच्छे तो राजनीति क़ी नयी खिलाडी कहे जानी वाली आम आदमी पार्टी रही जिसने नये प्रचार साधनो का बखूबी प्रयोग किया और अपनी बात जनता तक पहुँचाने मे कई राजनीति के पुराने स्थापितो से बेहतर साबित हुए।
नयी सोच आज अपने बडो की
बनायी पगडंडी पर चलने की सोच से अलग सोच रखती है, आज ज्यादातर युवा अपने पुस्तैनी
काम से अलग ही अपनी सोच बना, अपनी जिन्दगी का रास्ता खूद ही बना रहे है। राजनीति
मे भी सोशल मीडिया से जुडे ये युवा अपनी नयी सोच से ही आगे बढ रहे है, ऐसा ही नही
है कि ये चुनावी नतीजे केवल दो महीने का प्रभाव है, इसमे पिछले दस सालो से सोशल
मीडिया पर किये गये होमवर्क का भी बहुत बडा योगदान है। आज के दौर मे किसी की सोच को
बाँध कर रखना सम्भव नही है। आज वोटर की स्तिथि सही मे यही है "इन्टरनैट जब
लगाविंग, नो उल्लु बनाविंग"। तमाम
विरोध प्रचारो के बावजूद भी जनता ने उभरते विकास के चेहरे को ही चुना है। वोटर को
अपना बैंक बैलेंस समझना आगे किसी के लिए भी आसान नही होगा, जिसको आगे आना है उसे
नयी सोच लेकर ही युवा देश के दिमाग मे अपनी जगह बनानी होगी। आज तक जहाँ अपने देश
मे अर्थनीति, विदेश नीति, रक्षा नीति आदि पर चुनाव
नही लडे जाते या कहे ये बडे मुद्दे नही होते, आने वाले समय मे शायद यही मुद्दे बडे
बने और जनता के सामने जाने से पहले राजनेताओ को इन मुद्दो पर तैयार होकर जाना पडे।
दिल्ली मे सभी सीटो पर भाजपा ने
छ्यालिस प्रतिशत वोट शेयर के साथ कब्जा किया है, वही
ध्यान देना होगा कि दिल्ली मे सभी सीटो पर
आआपा तैतीस प्रतिशत वोट शेयर के साथ दूसरे स्थान पर रही है, वही पंजाब मे भी आआपा ने
लगभग चौबीस प्रतिशत वोट शेयर के साथ चार सीटो पर कब्जा किया है, इसके अलावा केवल वाराणसी
मे ही आआपा कुछ असर दिखा पायी। लेकिन
कुल मिलाकर नयी पार्टी होने के बावजूद आआपा ने अपनी उपस्तिथि दर्ज करायी। लोकतंत्र मे प्रतिस्पर्धा
की महत्ता को नकारा नही जा सकता और उम्मीद करनी चाहिए आआपा हो या कांग्रेस या कोई
दूसरी पार्टी बदलते सामाजिक परिवेश मे बदलती जरुरतो को ध्यान मे रखकर आगे आयेगी।
भाजपा ने अपने ही एक सौ
ब्यासी सीटो के रिकार्ड से आगे बढी है और कांग्रेस को भी ऐसे चुनावी परिणाम पहली
बार देखने को मिले है, इस लिहाज से ये चुनाव एतिहासिक रहा है। यहाँ से राजनीति एक
नयी दिशा लेती दिखायी दे रही है। ग्लोबलाइजेशन
के इस दौर मे परिवर्तन को अपनाना होगा और अपनी मूल सोच को भी लेकर चलना होगा। इन एतिहासिक चुनावी
परिणामो ने भाजपा के कंधो पर बोझ बढा दिया है अब देश की दिशा और दशा पर पूरे विश्व की नजर होगी। आर्थिक स्तर पर भाजपा
अपनी कार्यशैली के परिणाम कई राज्यो मे दिखा चुकी है, अब यहाँ विश्व पटल पर किस
तरह भाजपा अपनी छाप छोडती है इस पर सबकी नजर है।
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