Monday, 26 May 2014


एक सुखद अनुभूति


एकतरफा चुनावी परिणाम से सदा ही एक सुखद अनुभूति मिलती है और उसी दौर को आज महसूस भी किया जा रहा है। अपने अपने द्रष्टिकोण से इन परिणामो को नये युग की शुरुआत, बडी चुनौती, बडी आशाओ का बोझ आदि संज्ञाओ से नवाजा जा रहा है। आरोप प्रत्यारोप और कुछ व्यंग्य बाणो के दौर से आगे निकलकर, अब प्रचंड बहुमत वाली सरकार ने आते ही कुछ मौन संवाद के दर्शन कराये है। चुनौतियाँ बडी है लेकिन आशा के रूप मे प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी सदा से ही चुनौतियो को अपनी इच्छा के दरवाजे से प्रवेश कराते दिखायी दिये है अपने क्षेत्र के महानायक के रुप मे उभरे सचिन तेन्दुलकर हो या अमिताभ बच्चन हो, जब-जब उन पर उनके कार्यक्षेत्र मे उनकी क्षमता और प्रदर्शन पर सवाल उठे, तब-तब उन्होने मौन संवाद का रास्ता अपनाकर, अपने प्रदर्शन से ही उन चुनौतियो का सधा हुआ जबाब दिया।

शपथ ग्रहण समारोह मे ही सार्क देशो की उपस्थिति ने देश के अन्दर और बाहर एक मजबूत संदेश के रुप मे देखा जा रहा है। पडोसियो ने भी सभी चुनौतियो को नकारकर या कहे हालिया मौके की नजाकत को समझते हुए, एक अच्छा निर्णय लिया। भले यह किसी समस्या का निराकरण ना हो लेकिन कूटनीतिक द्रष्टि से एक दिशानिर्धारण मे मददगार तो कहा ही जा सकता है। जो इस समारोह मे शामिल हुए और जो नही भी हुए, सभी को एक संदेश तो गया ही है। अमेरीकी राष्ट्रपति ओबामा की अफगानिस्तान यात्रा मे दिये गये वक्तव्य के अनुसार अभी अफगानिस्तान पूरी तरह सुरक्षित नही है जो (बाइलेटरल सिक्योरिटी एग्रीमैन्ट) बीएसए संधि  की जरुरत को बल देता है बीएसए के अनुसार अमेरीकी फोर्स अफगानिस्तान मे तैनात रह सकती है। अफगानिस्तान राष्ट्रपति अहमद करजई पहले ही बीएसए से अपनी असहमति जाहिर कर चुके है। दक्षिण एशिया के डेढ अरब से ज्यादा जनसंख्या वाले आठ देशो के दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को राजनैतिक और व्यापारिक स्तर पर निरन्तर सुद्रढ होना, विश्व पटल पर अपनी बात बेहतर और मजबूत तरीके से रखने मे मददगार होगा। "मिनिमम गवर्नमैंट मैक्सीमम गवर्नैंस" के सिद्धान्त का भी इस समारोह मे आभास हुआ, काफी हद तक सभी को साथ लेकर मिनिमम गवर्नमैंट दिखायी दे रही है, अभी मैक्सीमम गवर्नैंस बाकी है। प्रधानमंत्री के साथ शपथ लेने वाले कौन-कौन होंगे, इस प्रश्न पर सुत्रो की अनुपस्तिथि संगठन पर मजबूत पकड की तरफ इशारा करती है। अभी इतना अच्छा तो है ही कि आज चर्चा मे विकास है, मजबूत नेतृत्व है और भविष्य के लिए आशाये है। लेकिन हर चुनौती पर बार बार अपनी कुशलता को अपने प्रदर्शन से सिद्ध करते रहना पडता है, ऐसा ही होता है।

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